लंदन ने किया मनुस्मृति को अग्नि-भेंट

ब्रिटेन: कल 25 दिसंबर, दिन मंगलवार को ब्रिटेन के कई शहरो में मनुस्मृति को जलाया गया ।मनुस्मृति एक ऐसी किताब है ,जिसके अनुसार मानव -मानव में फ़र्क़ किया जाता है और सबसे ज़्यादा उसमें महलायो के समान का हनन किया गया है । इस किताब को सबसे पहले डाक्टर भीम राव अम्बेडकर जी ने 25 दिसंबर 1927 को जलाया था । इसी अमानवता वाली किताब को आज भी जलाने की नोबत महसूस होती है, जब आज भी संजलि जैसी मासूम को शरेयाम ज़िंदा जला दिया जाता है । विदेशों में कई जगह पर मनुस्मृति जलाई गई जिसमें ब्रिटेन में इस अमानवता वाली किताब को जलाया गया । याद रहे मनुस्मृति जलाने का आग़ाज़ ब्रिटेन के शहर लंदन से पिछले साल से हुआ ।क्यूँकि तब कुछ मनुवादीयो ने भारत के सविधान को दिल्ली में जलाया था । ब्रिटेन के शहर वुलवरहैंपटन में “बसपा सप्पोटरस यू॰के॰ ” की तरफ़ से मनुस्मृति को जलाया गया और वहीं लंदन में सभी अंबेडकरी युवा द्वारा मनु की मनुस्मृति को अग्नि भेंट किया गया और साथ में ही वो पाँच प्रतिज्ञा को भी पढा गया जो बाबा साहिब ने 27 दिसंबर 1927 को दी थी । Author: Ranjit
What is Hinduism? Can it be defined?
Hinduism = Jatism (Casteism) AND Jatism/Casteism = Hinduism (Jati is commonly but not precisely translated as caste). I am equating Hinduism with Jatism/casteism because: 1. If you ask ANY person who professes to follow Hinduism, whether they come from a family that has a jati identity or not, the answer will invariably be YES of course they do […]
Manusmiriti and other texts supporting Varna dharmas burnt for a whole week in UK

लंडन में मनुस्मृति को लगातार सात दिन जलाया गया और हर साल जलाए जाने का भी कहा गया । This one was Black week for Varnadharmis One unholy Brahmanic book burnt per day for seven days. FROM: 9th August 2018 International Indigenous Peoples Day. This was the day that the Varnadharmis, headed by Brahmins burnt the Constitution of India, just yards away from the parliament but no action was taken by the authorities To 15th […]
Dr. B. R. Ambedkar portrait unveiled in Gray’s inn, London Dr. B. R. Ambedkar portrait unveiled in Gray’s inn, London

History: Baba Saheb Dr. B.R. Ambedkar, officially recognised as one of the greatest lawyers in history, has his portraits amongst the finest in the world at the prestigious Grays Inn in London. Furthermore, he is the only person honoured with two portraits here and the only non-White. What an achievement Babasaheb! Thanks to “Dr Ambedkar […]
Global Ambedkar Jayanthi Zoom Event 2021 organised by Ambedkar International Mission, London.
22 VOWS OF BABASAHEB DR B.R. AMBEDKAR

BACKGROUND: Babasaheb Dr. B. R. Ambedkar prescribed these vows so that: 1. There may be complete severance of bond with the old Hindu customs that promote superstition and caste which in turn hinders fraternity, human progress and scientific temper 2. To protect Buddhism from unnecessary confusion, contradictions and adulteration These vows were administered by Babasaheb […]
QUESTION 3: How can we unite Dalits all over India & world?

QUESTION 3: How can we unite Dalits all over India & world? Time to Organize. ANSWER by Shekhar Bodhakar: WHY DO YOU WANT “DALITS” TO UNITE ANYWAY AND AGAINST WHOM? The exact meaning of the word “DALIT” is ‘ground down’, or ‘broken to pieces’. [Academic Ref]: Anupama Rao, Representing Dalit selfhood the word ‘DALIT” is an adjective, derived […]
QUESTION: क्या भीमराव अम्बेडकर को भारत में आरक्षण के लिए दोषी ठहराया जा सकता है?

QUESTION: क्या भीमराव अम्बेडकर को भारत में आरक्षण के लिए दोषी ठहराया जा सकता है? Answered by Shekhar Bodhakar यह आपके लिए आश्चर्य की बात हो सकती है परन्तु डॉ आंबेडकर आरक्षण व्यवस्था चाहते ही नहीं थे बल्कि कस्तूरबा गांधी के निवेदन पर महात्मा गांधी की जान बचाने के लिए उन्हें यह निर्णय लेना पड़ा। डॉ आंबेडकर ने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था को नहीं बनाया जैसा कि आम तौर पर दिखाया जाता है। वे केवल उस समय की सरकार द्वारा ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्से मैकडॉनल्ड के द्वारा स्वीकृत कानूनी “कम्युनल अवॉर्ड” को लागू करवाना चाहते थे। इस समझौते ने आरक्षित जाति व जनजातियों को हिन्दू बहुसंख्यक सरकार से राजनीतिक सुरक्षा के रूप में एक अलग निर्वाचन क्षेत्र देने का अधिकार दिया जिसकी स्वतंत्रता पश्चात सत्ता में आने (लागू होने) की आशा थी। वे गांधीजी ही थे जिन्होंने इस अधि निर्णय का विरोध किया; इसके पश्चात वे आंबेडकर पर अलग निर्वाचन क्षेत्र के बदले में आरक्षण स्वीकार करने का दबाव (या यूं कहें कि एक प्रकार की भावनात्मक धमकी <इमोशनल ब्लैकमेल> ) डालने के लिए भूख हड़ताल पर चले गए। पर मजे की बात तो ये है कि इस गांधीजी ने सिखों, मुस्लिमों, आंग्ल- भारतीयों.… आदि के लिए स्वीकृत अलग निर्वाचन क्षेत्र का विरोध नहीं किया.. उन्होंने केवल अस्पृश्यों व जनजातियों को लेकर विरोध किया। यदि किसी ने आरक्षण व्यवस्था बनाकर देश का विनाश किया है तो ये वो लोग हैं जिन्होंने “जाति वा जातिवाद” को बनाया। इसने वर्णाश्रम व्यवस्था के नाम पर समाज के हाशिए पर रखे समुदायों के लिए अकल्पनीय कठिनाइयां और निर्दयता उत्पन्न कर दी। यदि यह इसके लिए नहीं होता तो अस्पृश्यों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की आवश्यकता ही नहीं होती, ना गांधीजी का उपवास और ना ही जाति आधारित संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था। आरक्षण हमारे संविधान में दिया गया है, केवल अम्बेडकर के द्वारा नहीं बल्कि उस समय के सभी भारतीय अधिनायकों के द्वारा जो कि संविधान सभा के सदस्य थे। योग्यता (मेरिट) आज भी इस देश में अनाथ है और इस पर किसी जाति विशेष का आधिपत्य नहीं है। केवल वही लोग जिनके निहित स्वार्थ हैं वे ही मेरिट के बारे में बात करते हैं। लोगों ने केवल एक जाति विशेष के लिए शिक्षा में जाति आधारित आरक्षण को असंख्य पीढ़ियों तक सहन किया और उस समय में किसी ने भी योग्यता के बारे में चिंता नहीं की। एक जाति विशेष के शत प्रतिशत लोग तो योग्य नहीं हो सकते और इसके बारे में उस समय तक किसी ने प्रश्न नहीं उठाया जब तक कि समानता, स्वतंत्रता, भाईचारे, सभी के लिए सामाजिक न्याय की भावना पर आधारित एक नए देश के निर्माण का समय नहीं आ गया जो की एक जाति आधारित समाज में कदापि संभव नहीं है। आरक्षण नीति पूना पैक्ट का परिणाम है! जो कि केवल गांधीजी के कम्युनल अवॉर्ड के विरोध में गैर कानूनी तौर पर भूख हड़ताल पर जाने के कारण हुआ जिसे आंबेडकर ने गोलमेज सम्मेलन में कानूनी रूप से जीता था। डॉ आंबेडकर ने ने उनके लिए कम्युनल अवॉर्ड की मांग की (और जीते भी) जो की शताब्दियों से यदि सदियों से नहीं, मानवाधिकारों से वंचित व दमन के शिकार हैं। और गांधीजी ने बदले में आरक्षण की मांग की इसलिए अम्बेडकर को आरक्षण हेतु दोषी ठहराना बंद करें जब तक कि आप पूना पेक्ट को नकारकर अलग निर्वाचन क्षेत्र के मूल समझौते को स्वीकार नहीं कर लेते। निष्कर्ष तो कौन है भारत में जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था का जिम्मेदार? ~Shekhar Bodhakar
QUESTION 4: What is the difference between Neo dalits and Pseudo Dalits?

Question 4: What is the difference between Neo dalits and Pseudo Dalits? ANSWER by Shekhar Bodhakar: Once you understand what the word “dalit” means, you will realize that the term “Neo-Dalit” makes no sense at all and mustn’t be used. Dalit means ‘ground down’, or ‘broken to pieces’. [Academic Ref]: Anupama Rao, Representing Dalit selfhood the word ‘DALIT” is […]
World Social Justice Day 20 February.

Representation is the greatest guarantee of social justice, peace, democracy, mortality and development. Survival of the fittest and Struggle for existence cannot be allowed to damage equity, participation, rights, access and justice. UNIVERSAL DECLARATION OF HUMAN RIGHTS CHARTER has been very helpful in explaining social justice. Dr Ambedkar was the pioneer of social justice who […]